विदेश

भारत की इंटेलीजेंस एजेंसी RAW और सऊदी के बीच हुआ एतिहासिक समझौता, पाकिस्‍तान के लिए बड़ा झटका

जारी हुआ आधिकारिक बयान
सऊदी अरब की कैबिनेट की तरफ से जो मंजूरी दी गई है, उससे जुड़ा एक आधिकारिक बयान भी जारी हुआ है। इस बयान के मुताबिक सऊदी सुरक्षा एजेंसी, रॉ के साथ मिलकर आतंकवादी घटनाओं और आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक दम पर लगाम कसने की दिशा में काम करेगी। सऊदी गजट की तरफ से इस पूरे समझौते के बारे में आधिकारिक तौर पर जानकारी दी गई है। इस गजट के मुताबिक देश की कैबिनेट जिसकी अध्‍यक्षता किंग सलमान ने की थी, उसमें ही इस समझौते को मंजूरी मिली है। यह मीटिंग अल सलाम पैलेस में पिछले दिनों हुई थी।
रॉ के साथ डील को मंजूरी
गजट में दी गई जानकारी के मुताबिक, ‘अल-सलाम पैलेस में किंग सलमान की अध्यक्षता में सऊदी कैबिनेट ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए देश की मुख्‍य सुरक्षा एजेंसी और भारत की रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के बीचअपराध और इसका वित्तपोषण रोकने से जुड़े सहयोग समझौते को मंजूरी दी।’ पिछले ही दिनों भारत के नए राजदूत सुहेल एजाज खान ने सऊदी अरब के गृह मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सऊद बिन नायेफ बिन अब्दुल अजीज से मुलाकात की थी। इस मीटिंग के बाद ही सऊदी अरब का यह बड़ा फैसला आया है। सऊदी प्रेस एजेंसी ने कहा कि स्वागत समारोह के दौरान आम हित के कई मुद्दों पर चर्चा की गई। इसी मुलाकात के बाद सऊदी अरब ने शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की तरफ पहला कदम बढ़ाया है।
पाकिस्‍तान में खामोशी
पाकिस्‍तान में इस पूरे मामले को लेकर पूरी तरह से खामोशी है जबकि मुल्‍क के विशेषज्ञ सऊदी और भारत के बीच इस समझौते को एतिहासिक करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि भारत और पाकिस्‍तान के बीच कई मसले हैं। मगर इनसे अलग भारत हमेशा कश्‍मीर में आतंकवाद के लिए पाकिस्‍तान को दोषी करार देता है। देश में मौजूद आतंकी संगठनों पर हमेशा भारत का सख्‍त रुख रहता है। पाकिस्‍तान के रक्षा विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ऐसे में भारत और सऊदी अरब के बीच हुई यह डील काफी महत्‍वपूर्ण है। भारत हमेशा कहता आया है सऊदी अरब में पाकिस्‍तान के कई आतंकी मौजूद हैं। ऐसे में यह डील वाकई पाकिस्‍तान के लिए बड़ा झटका है। वो यह भी मानते हैं। इसका मतलब यही हुआ के भारत और सऊदी अरब अब आतंकवाद के मामले में ए‍क ही दिशा में सोच रहे हैं।
सऊदी अरब ने किया किनारे
पाकिस्‍तान के रक्षा विशेषज्ञों ने यह भी याद दिलाया है कि पाकिस्‍तान और सऊदी अरब के बीच एक रक्षा समझौता भी है। पाकिस्‍तान के हजारों मिलिट्री ऑफिसर्स जिनमें सर्विंग औ‍र रिटायर्ड दोनों ही शामिल हैं, अभी तक सऊदी अरब में हैं। साथ ही सऊदी की सेनाओं के साथ एक ट्रेनिंग समझौता भी है। ऐसे में यह समझौता पाकिस्‍तान के लिए टेंशन की बड़ी वजह है। जानकारों के मुताबिक इससे समझ जाना चाहिए कि पाकिस्‍तान किस दिशा में जा रहा है। सऊदी अरब के साथ आना यह बताता है कि खाड़ी के मुसलमान देशों के बीच आपकी अब ज्‍यादा हैसियत नहीं बची है।
कश्‍मीर पर अब नहीं कोई मदद
उन्‍होंने कहा कि इसकी शुरुआत पांच अगस्‍त 2019 से ही हो गई थी। उस समय भारत ने जम्‍मू कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 को हटाकर इसका विशेष दर्जा खत्‍म कर दिया था। उस समय भी सऊदी अरब समेत मुसलमान देशों ने पाकिस्‍तान को तवज्‍जो नहीं दी थी। वो मानते हैं कि कश्‍मीर के मामले पर अब खाड़ी देशों की तरफ से पाकिस्‍तान को ज्‍यादा समर्थन नहीं मिलेगा। यह डील ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्‍तान को सऊदी अरब और संयुक्‍त अरब अमीरात (UAE) से आर्थिक मदद की जरूरत है। इस मदद की वजह से ही अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (IMF) का बेलआउट पैकेज प्रोग्राम अटका हुआ है। फिलहाल अब पाकिस्‍तान खाड़ी देशों की तरफ से भी किनारे किया जा सकता है। यह समझौता कम से कम इसी तरफ इशारा करता है।

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